राजस्थान में सरकारी विभागों द्वारा बजट के आवंटित धनराशि को खर्च करने की गति को लेकर वित्त विभाग ने गंभीर चिंता जाहिर की है। प्रशासनिक तंत्र में बजट व्यय की प्रक्रिया में आई कमजोरियों को दूर करने के लिए विभाग ने सभी संबंधित एजेंसियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सरकार द्वारा आर्थिक वर्ष के दौरान विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए जो बजट निर्धारित किया जाता है, उसका समय पर और सही तरीके से उपयोग करना सुशासन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, राजस्थान में कई विभागों में इस आवश्यकता को पूरा करने में कमी देखी जा रही है, जिससे योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधाएं आ रही हैं।
वित्त विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि बजट के नियमों का पालन करना हर विभाग की जिम्मेदारी है। जब तक सभी एजेंसियां आवंटित धनराशि को निर्धारित समय में खर्च नहीं करेंगी, तब तक विकास संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करना असंभव होगा। इसलिए प्रत्येक विभाग को अपनी कार्य क्षमता बढ़ानी होगी और वित्तीय अनुशासन का पालन करना होगा।
राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों को हर महीने बजट व्यय की प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इससे न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि समय रहते किसी भी समस्या की पहचान की जा सकेगी और उसका समाधान निकाला जा सकेगा। विभागीय स्तर पर भी बजट प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाने को कहा गया है।
यह कदम राजस्थान में सुशासन और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। लोक निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में योजनाओं का सफल संचालन बजट के सुचारु प्रवाह पर निर्भर करता है। इसलिए विभागों को अपनी आंतरिक प्रणालियों को मजबूत करना होगा ताकि धनराशि का सही समय पर सही जगह पर उपयोग हो सके।
वित्त विभाग का यह कड़ा रुख राज्य के विकास कार्यों को गति देने और नागरिकों तक सेवाएं बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए आवश्यक समझा जा रहा है। आने वाले समय में इसी दिशा में और भी कठोर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
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