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कॉमनवेल्थ खेलों में भारत की उपलब्धियां केवल स्वर्ण पदकों तक सीमित नहीं मानी जा सकतीं। कई रजत और कांस्य पदक भी ऐसे हैं, जिन्हें महत्व भले ही कम दिया जाता है। सवाल यह है कि क्या केवल इनसे सितंबर में होने वाले एशियाई खेलों और 2 साल बाद होने वाले ओलंपिक्स के लिए कोई बड़ी उम्मीद बंधती दिखती है?
स्रोत: Navbharat Times | पूरी खबर यहां पढ़ें
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