राजस्थान में बना या मुगलों के साथ आया, क्या है सावन में खाई जाने वाली लाजवाब मिठाई ‘घेवर’ की कहानी? – was ghevar created in rajasthan or did it arrive with the mughals story of this sweet is fascinating – Jagran

राजस्थान की मिठाइयों की बात करें तो एक नाम हमेशा सबसे आगे आता है – घेवर। यह वह मिठाई है जो न केवल पूरे देश में बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुकी है। खासकर सावन के महीने में जब घर-घर में त्योहार की तैयारी होने लगती है, तो घेवर की मांग बहुत बढ़ जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस स्वादिष्ट मिठाई की वास्तविक कहानी क्या है और यह राजस्थान में कब से बनाई जा रही है?

घेवर के इतिहास को लेकर विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह मिठाई राजस्थान की अपनी देशज परंपरा का हिस्सा है, जिसे यहां के राजपूत राजाओं के दरबारों में बनाया जाता था। दूसरी ओर, कुछ इतिहासकारों का विश्वास है कि मुगल काल के दौरान जब मुगल राजाओं का राजस्थान पर प्रभाव था, तब इस प्रकार की मिठाइयों की परंपरा आई होगी। मुगल बादशाहों के दरबार में फारसी व्यंजनों को अपनाया जाता था, और संभव है कि घेवर भी इसी परंपरा का एक हिस्सा हो।

लेकिन चाहे घेवर की उत्पत्ति कहीं से भी हुई हो, आज यह मिठाई पूरी तरह से राजस्थान की पहचान बन गई है। जयपुर, जोधपुर और अन्य राजस्थानी शहरों में बनाया जाने वाला घेवर अपनी विशेष बनावट, स्वाद और खस्ता-मस्ता तलहे के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इसे बनाने के लिए मैदा, खोये और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है, और फिर इसे घी में तलकर चाशनी में डुबोया जाता है। इसके ऊपर विभिन्न प्रकार की सजावट की जाती है जिसमें सूजी, नारियल, मेवे और खोये की बारीकियां शामिल होती हैं।

घेवर बनाने की प्रक्रिया बहुत ही कला का काम है। इसे एक विशेष सांचे में डाला जाता है जिसके कारण इसका आकार बहुत ही खूबसूरत और सुंदर बनता है। पारंपरिक घेवर में बारीक जालीदार डिजाइन होते हैं जो इसे देखने में और भी आकर्षक बनाते हैं। घेवर के विभिन्न प्रकार भी हैं – कहीं मावे का घेवर मिलता है तो कहीं प्लेन घेवर भी उपलब्ध होता है।

सावन का महीना घेवर के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी समय श्रावणी त्योहार मनाए जाते हैं और देशभर में रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं। इन अवसरों पर घेवर घर-घर में बनाया और खाया जाता है। इसके अलावा, विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर भी घेवर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजस्थान के किसी भी प्रमुख पर्व या समारोह में घेवर की उपस्थिति लगभग अनिवार्य मानी जाती है।

आज के समय में घेवर केवल एक मिठाई नहीं रही, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा का प्रतीक बन गई है। चाहे इसकी उत्पत्ति कहीं से भी हुई हो, यह मिठाई राजस्थानी संस्कृति के साथ इतनी गहराई से जुड़ गई है कि इसे अलग करके सोचा ही नहीं जा सकता।

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