राजस्थान में मानसून की गतिविधि पुनः तेज हो गई है। मौसम विभाग की ओर से जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आने वाले दिनों में भारी वर्षा की संभावना है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से तीस से अधिक जिलों में मुसलाधार बारिश हो सकती है, जिससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका है।
राजधानी जयपुर में पिछली रात से ही लगातार वर्षा हुई है। इस बारिश ने शहर के विभिन्न इलाकों में जल भराव की समस्या पैदा की है। सड़कों पर पानी भरा होने से यातायात प्रभावित हुआ है और नागरिकों को आवागमन में मुश्किलें आ रही हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, जबकि व्यापारियों का सामान भी प्रभावित हुआ है।
पूर्वी राजस्थान के करौली जिले में वर्षा की स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। यहां एक इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य मानदंड से अधिक है। इतनी तेजी से गिरने वाली बारिश से नालों और नदियों में जल स्तर बढ़ने लगा है। स्थानीय प्रशासन गांवों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा रहा है। खेतों में खड़ी फसलें इस अचानक बारिश से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे किसानों की आजीविका को खतरा है।
मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मानसून प्रणाली अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। इसके तहत पूरे प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित करके अलग-अलग तरह के मानसून सक्रियता के अलर्ट जारी किए गए हैं। कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, तो कुछ स्थानों पर बेहद भारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर आपातकालीन तैयारी की जा रही है। स्कूल और कॉलेज संभावित दुर्घटनाओं से बचने के लिए अपनी गतिविधियों को समायोजित कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कर्मचारियों को तैनात किया गया है। बिजली विभाग भी किसी भी इमरजेंसी के लिए तैयार है।
नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे घर के अंदर रहें और अनावश्यक बाहर न निकलें। पुरानी और कमजोर दीवारों वाली इमारतों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नदियों और नालों के पास जाने से सख्त परहेज करना चाहिए, क्योंकि अचानक जल प्रवाह में तेजी आ सकती है। जानवरों को भी संरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए।
कृषि विभाग किसानों को सलाह दे रहा है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बागवानी फसलें विशेष रूप से असुरक्षित हैं, इसलिए उनके लिए अतिरिक्त देखभाल जरूरी है। इसके साथ ही, सड़कों पर पानी भरा होने से सामान्य जनजीवन भी प्रभावित होगा, जिससे दोपहर के समय व्यावसायिक गतिविधियों में भी कमी आने की संभावना है।
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