
हॉकी इंडिया ने क्या राष्ट्रीय टीम की पहचान से जुड़े इतने अहम फैसले में अपने संविधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया था, ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. अगर दिलीप तिर्की का दावा सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में हॉकी इंडिया को सिर्फ जर्सी के रंग पर नहीं, बल्कि फैसले लेने के तरीके और पारदर्शिता पर भी जवाब देना पड़ सकता है.
स्रोत: AajTak | पूरी खबर यहां पढ़ें
प्रातिक्रिया दे