‘बांग्लादेश लौटना नामुमकिन, कोलकाता ज्यादा प्रोग्रेसिव…’, 19 साल बाद कोलकाता लौटी तसलीमा नसरीन बोलीं – AajTak

लेखिका तसलीमा नसरीन ने आजतक से विशेष बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी होनी चाहिए. अगर अपनी बात कहने के अधिकार का सम्मान नहीं किया जाता, अगर बोलने की आज़ादी नहीं है, अगर किताबों पर प्रतिबंध लगाया जाता है, या लोगों को देश से बाहर भेज दिया जाता है तो अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन होता है. यह लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है.

स्रोत: AajTak | पूरी खबर यहां पढ़ें

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