
US-Iran में नए सिरे से जंग जारी है और कच्चे तेल की कीमतों में बीते कुछ दिनों में जोरदार तेजी आई है. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर क्रूड महंगा होता रहा, तो IEA अपना तेल का खजाना फिर खोल सकता है.
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US-Iran में नए सिरे से जंग जारी है और कच्चे तेल की कीमतों में बीते कुछ दिनों में जोरदार तेजी आई है. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर क्रूड महंगा होता रहा, तो IEA अपना तेल का खजाना फिर खोल सकता है.
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अब धर्मेंद्र प्रधान की जगह कर्नाटक से BJP के सांसद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
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Dividend Stocks: शेयर बाजार में तीन कंपनियों ऐसी हैं जिनकी तरफ से निवेशकों को 50 रुपये से अधिक का डिविडेंड दिया जा रहा है। इसमें एक नाम ब्रिटानिया का भी है। , Share-market Hindi News – Hindustan
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आज दुनिया नॉर्थ कोरिया को एक ऐसी अंधेरी सुरंग के रूप में जानती है, जहां रहने वाले लोगों के बारे में न कोई जानकारी आती है, न वहां के लोगों का दुनिया से कोई कनेक्शन दिखता है. जानकारी आती है तो सिर्फ किम शासन की सख्ती की, लोगों की गरीबी और मुश्किलों की और रोज नई-नई मिसाइलों की परीक्षण की. लेकिन क्या नॉर्थ कोरिया में रहने वाले लोगों की जिंदगी हमेशा से ऐसी ही थी या फिर उनके जीवन में भी आजादी थी?
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केंद्र सरकार ने भारतीय नाविकों को काला सागर जैसे संघर्ष वाले समुद्री इलाकों में नौकरी करने से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने ब्लैक सी और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते सुरक्षा खतरों को देखते हुए यह एडवाइजरी जारी की है।
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विक्रम-1 से लेकर कॉमनवेल्थ तक, ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हर घर तिरंगा फहराने की अपील; जानें PM मोदी क्या-क् – India TV Hindi
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को धन्यवाद दिया. कारण, सीजेआई के एक तंज से ही इस पूरे आंदोलन की नींव रखी गई. सोशल मीडिया से शुरू होकर कॉकरोच क्रांति देश की सड़कों तक उतर आई.
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जयपुर में शिक्षा संस्थानों से जुड़े छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक गलियारों में तनाव बढ़ गया है। इस मामले में विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं और अपनी-अपनी मांगें उठा रहे हैं। क्षेत्रीय नेतृत्व के स्तर पर इस विवाद को लेकर काफी गरमागर्मी देखने को मिल रही है।
जयपुर के राजनीतिक परिदृश्य में मुखर नेताओं में से एक ने हाल ही में छात्र आंदोलन के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति के कंधों पर नहीं डाली जा सकती। उनके अनुसार, जो लोग प्रशासन में उच्च स्थान पर हैं, उन सभी को अपनी जिम्मेदारी का आकलन करना चाहिए।
इस नेता ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की शिकायतें गंभीर हैं और उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जो कमियां दिख रही हैं, उनका समाधान निकालना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उनके बयानों से साफ झलकता है कि वह सिर्फ एक अधिकारी को ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को दोषी मानते हैं।
राजस्थान में शिक्षा को लेकर विभिन्न मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहे हैं। छात्रों को अपनी कई शिकायतें लेकर आंदोलन करने पड़ते हैं। इन आंदोलनों के मामले में राजनीतिक दलों का रुख अलग-अलग होता है, लेकिन ज्यादातर नेता सार्वजनिक रूप से छात्रों का समर्थन करने का दावा करते हैं।
जयपुर जैसे बड़े शहरों में जहां बड़ी संख्या में शिक्षार्थी हैं, वहां किसी भी शिक्षा संबंधी समस्या का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। राजनेता इसे अपने राजनीतिक लाभ के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में शिक्षा मुद्दों पर भी सियासत चलना आम बात हो गई है।
वर्तमान परिस्थितियों में यह देखना महत्वपूर्ण है कि सरकार इन मुद्दों को किस तरह हल करती है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और छात्रों की वाजिब मांगों को पूरा करना ही असली लक्ष्य होना चाहिए, न कि सिर्फ राजनीतिक लाभ पाना। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस विवाद का क्या परिणाम निकलता है।
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Friday Box Office Collection 24th July: फ्राइडे को बॉक्स ऑफिस पर
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‘हमारे समाज में ये अच्छा नहीं माना जाता’, आमिर की तीसरी शादी पर हिना खान का कमेंट, भड़के लोग, सुनाई खरी-खोटी – India TV Hindi
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