
क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म रातों से वैश्विक स्तर पर सालाना 56 घंटे की नींद का नुकसान हो रहा है। भारत इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां दक्षिणी और तटीय शहरों में लोग हर साल 90 घंटे से ज्यादा नींद खो रहे हैं।
स्रोत: Jagran | पूरी खबर यहां पढ़ें
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