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शुरुआत में सरकार को भरोसा था कि छात्र आंदोलन सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगा और जल्द शांत हो जाएगा। लेकिन 20 जुलाई के बाद जमीनी समर्थन बढ़ने लगा, जिसके बाद सरकार ने अपनी रणनीति बदली और आंदोलन का नए सिरे से आकलन शुरू किया।
स्रोत: Navbharat Times | पूरी खबर यहां पढ़ें
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