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मोहन भागवत ने परिवार में संवाद और समय देने को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया, साथ ही माता-पिता को बच्चों के लिए आदर्श आचरण प्रस्तुत करने पर जोर दिया।
उन्होंने भारतीय संस्कृति के महत्व और मातृत्व की शाश्वत भूमिका पर भी प्रकाश डाला, कहा कि एकता ही सत्य है और विविधता में एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल है।
स्रोत: Jagran | पूरी खबर यहां पढ़ें
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