राजस्थान में बनती थीं नकली दवाएं: लखनऊ से पूरे यूपी में सप्लाई; फोन-पे से पेमेंट, बसों से होती थी डिलीवरी – Dainik Bhaskar

देश में नकली दवाओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हाल ही में जब सरकारी एजेंसियों ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, तो यह साफ हो गया कि यह समस्या कितनी व्यापक है। राजस्थान के कुछ इलाकों में छिपे हुए अवैध कारखानों में नकली दवाओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन चल रहा था। इन दवाओं को फिर उत्तर प्रदेश तक पहुंचाया जाता था, जहां से उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में वितरित किया जा रहा था।

इस अवैध कारोबार को अंजाम देने वाले लोग आधुनिक तरीके अपना रहे थे। डिजिटल भुगतान के माध्यम से मनी ट्रांसफर किया जाता था, जिससे सीधे नकद लेनदेन का कोई सबूत न रहे। इस तरह के भुगतान तरीकों का इस्तेमाल करके वे अपनी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। यह बात दर्शाती है कि नकली दवाओं का यह नेटवर्क कितना संगठित था और कितनी सावधानी से संचालित हो रहा था।

दवाओं की डिलीवरी के लिए भी उन्होंने सार्वजनिक परिवहन का दुरुपयोग किया। बसों में इन दवाओं को छिपाकर एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था। इस तरीके से उन्हें लगता था कि उनकी गतिविधियां सुरक्षित रहेंगी और किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाएगा। सार्वजनिक परिवहन का इस प्रकार से गलत इस्तेमाल करना न केवल कानूनी दृष्टि से अपराध है, बल्कि आम जनता के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।

यह पूरा मामला दवा उद्योग की नियामक व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। नकली दवाएं जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं। ऐसी दवाएं न केवल बीमारियों का इलाज करने में विफल रहती हैं, बल्कि कई बार रोगियों को और भी अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए इस प्रकार की गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता होती है।

अधिकारियों द्वारा इस नेटवर्क का पर्दाफाश करना एक सकारात्मक कदम है। ऐसी कार्रवाइयां समाज में यह संदेश देती हैं कि नकली दवाओं का कारोबार सहन नहीं किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए और भी सतर्क रहना चाहिए। आम नागरिकों को भी अपनी सतर्कता बनाए रखनी चाहिए और केवल पंजीकृत दुकानों से ही दवाएं खरीदनी चाहिए ताकि वे नकली दवाओं का शिकार न बन जाएं।

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