
कश्मीर के लोकजीवन में यह किस्सा आज भी उतना ही जीवंत है. जितना हर पतझड़ में लाल हो उठने वाला चिनार का पेड़. वही चिनार जो सदियों से कश्मीर को शीतलता दे रहा है और जिसकी छांव सदियों से प्रकृति प्रेमियों कवियों, सूफ़ियों-संतों और कलाकारों का रोमांटिक एड्रेस रहा है.
स्रोत: AajTak | पूरी खबर यहां पढ़ें
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