भारतीय कृषि का इतिहास विभिन्न राज्यों के बीच पारंपरिक फसलों को लेकर उठने वाले विवादों से भरा है। हाल के समय में मसालों के भौगोलिक संकेत यानी जिओग्राफिकल इंडिकेशन टैग को लेकर राजस्थान और गुजरात के बीच एक नया विवाद सामने आया है। यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि हजारों किसान परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।
जीरा और सौंफ जैसे मसाले भारतीय रसोई की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। इन मसालों की खेती देश के विभिन्न हिस्सों में होती है, लेकिन गुणवत्ता और उत्पादन के मामले में कुछ क्षेत्र विख्यात हैं। जब किसी विशेष क्षेत्र को किसी उत्पाद के लिए जीआई टैग दिया जाता है, तो उस क्षेत्र के उत्पादकों को बाजार में विशेष स्थान और मूल्य मिलता है। यही कारण है कि दोनों राज्य इस मान्यता के लिए अपना दावा ठोक रहे हैं।
राजस्थान के किसानों का मानना है कि उनके क्षेत्र में जीरे की खेती सदियों से परंपरागत तरीकों से की जाती रही है। इसी तरह गुजरात के किसान भी अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु को इन मसालों की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार मानते हैं। जब दोनों राज्य एक ही उत्पाद के लिए जीआई टैग की मांग करते हैं, तो प्रशासनिक स्तर पर समस्या खड़ी हो जाती है।
जीआई टैग का महत्व समझना जरूरी है। यह टैग किसी उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान देता है। इससे निर्यात बढ़ता है, किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है, और नकली उत्पादों से बचाव मिलता है। इसलिए जब किसी क्षेत्र को यह मान्यता मिल जाती है, तो उस क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
वर्तमान परिस्थितियों में छोटे और सीमांत किसान अधिक प्रभावित हो रहे हैं। मसालों की खेती करने वाले अधिकांश किसान परिवार कम भूमि पर निर्भर हैं और उन्हें बेहतर मूल्य की बहुत जरूरत है। जीआई टैग का मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि उनकी रोजी-रोटी का सवाल बन गया है।
इस विवाद को सुलझाने के लिए केंद्रीय सरकार के विभिन्न विभाग काम कर रहे हैं। कृषि विभाग और बौद्धिक संपदा कार्यालय दोनों क्षेत्रों के दावों की जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिक तरीकों से यह निर्धारित किया जा रहा है कि किस क्षेत्र के मसाले की अपनी विशिष्ट पहचान है।
समाधान के लिए एक संभावना यह भी है कि दोनों राज्यों के किसानों के बीच आपसी समझदारी बने या फिर आंचलिक स्तर पर किसानों के हित को प्राथमिकता दी जाए। कुछ विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि यदि दोनों क्षेत्रों के मसालों की गुणवत्ता समान है, तो जीआई टैग क्षेत्रीय स्तर पर दिया जा सकता है।
इस विवाद का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी है क्योंकि यह दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र में अभी भी कितने सारे अनसुलझे मुद्दे हैं। किसानों की आवाज को सुना जाना और उनके हितों को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी राज्य से संबंधित हो।
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