सरकारी स्कूल के बच्चों का ‘राजस्थानी-प्रेम’; नया जंतर-मंतर-‘मंत्रीजी का अगला नंबर’ – Dainik Bhaskar

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों का अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति लगाव देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षार्थी राजस्थानी भाषा, संस्कृति और लोकविद्या को सीखने-समझने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। यह प्रवृत्ति शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

स्कूलों में पढ़ाई जाने वाले पाठ्यक्रम में राजस्थान की समृद्ध विरासत को शामिल किए जाने से बच्चों में अपनी जड़ों से जुड़ने की भावना जागृत हुई है। शिक्षकों का कहना है कि जब बच्चों को उनकी अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी दी जाती है, तो उनकी सीखने की गति में वृद्धि होती है। घर की भाषा में पढ़ाई से बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

राजस्थान की लोक संस्कृति, लोकगीत, लोककथाएं और परंपरागत ज्ञान को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को न केवल किताबी ज्ञान मिल रहा है बल्कि वे अपनी परंपराओं को भी समझ पा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में इस तरह की पहल से शिक्षा को अधिक प्रभावी और प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर, कला-संस्कृति और परंपरागत कौशल की जानकारी दी जा रही है। इन कार्यक्रमों में बच्चे न केवल दर्शक बनते हैं बल्कि सक्रिय भागीदारी भी करते हैं। यह व्यावहारिक शिक्षा का तरीका बच्चों के समग्र विकास में मदद करता है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय भाषा और संस्कृति के माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा अधिक प्रभावशाली साबित होती है। जब बच्चों को उनके आसपास के वातावरण और अपने समाज के बारे में सिखाया जाता है, तो वे विषय को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। इसके अलावा, इससे स्कूल छोड़ने की दर में भी कमी आती है।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा मिलती है। इन स्कूलों में सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बनाए रखते हुए आधुनिक शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है। यह संतुलन बनाना किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इस प्रकार की शिक्षणीय पहल से यह संदेश जाता है कि बच्चों की अपनी संस्कृति के प्रति जिज्ञासा और प्रेम उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाता है। राजस्थान जैसे राज्य में जहां सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक महत्व अधिक है, वहां इस तरह की शिक्षा पद्धति आजकल की जरूरत बन गई है।

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